सरहद के रक्षक अब संभालेंगे रामनगरी की कमान: एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के पहले CEO

देश की सीमाओं पर वायु सेना का नेतृत्व करने से लेकर अयोध्या के भव्य राम मंदिर का प्रबंधन संभालने तक—पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने करीब दो महीने चली चयन प्रक्रिया के बाद उन्हें मंदिर परिसर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया है।

नई जिम्मेदारी और प्रशासनिक चुनौतियाँ

30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त हुए जितेंद्र मिश्रा अब मंदिर परिसर की प्रशासनिक, सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्थाओं को एक नया ढाँचा देंगे। हाल ही में दान राशि में अनियमितताओं और दर्शन पास के नाम पर होने वाली धांधली की खबरों के बाद प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के लिए ट्रस्ट ने यह कदम उठाया है।

नए सीईओ के समक्ष मुख्य प्राथमिकताएँ:

  • भक्तों के लिए सहज दर्शन व्यवस्था: हर दिन मंदिर आ रहे 1 से 1.5 लाख श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन के इंतजाम करना।
  • वित्तीय अनुशासन व पारदर्शिता: दान में मिलने वाली राशि का सटीक हिसाब-किताब रखना और श्रद्धालुओं के भरोसे को बहाल करना।
  • साधु-संतों के साथ समन्वय: अयोध्या के स्थानीय संतों की सीईओ मॉडल से जुड़ी शंकाओं को दूर करना और देश भर से आने वाले धर्माचार्यों के लिए उचित सम्मानजनक व्यवस्था करना।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सर्वोच्च सैन्य सम्मान

जितेंद्र मिश्रा के पास विषम परिस्थितियों में कड़े फैसले लेने का लंबा अनुभव है। 1 जनवरी 2025 को उन्होंने देश की अति-संवेदनशील ‘वेस्टर्न एयर कमांड’ का प्रभार संभाला था। पुलवामा हमले के पश्चात चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनकी कुशल रणनीति और नेतृत्व के लिए उन्हें ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया। युद्धकालीन परिस्थितियों में असाधारण योगदान के लिए दिया जाने वाला यह पुरस्कार बीते 46 वर्षों में केवल 10 सैन्य अधिकारियों को ही प्राप्त हुआ है।

1999 कारगिल युद्ध का वो ऐतिहासिक फैसला

सेना में रहते हुए जितेंद्र मिश्रा की सबसे चर्चित उपलब्धियों में से एक 1999 का कारगिल युद्ध है। जब पाकिस्तानी घुसपैठिये टाइगर हिल और तोलोलिंग जैसी बर्फीली चोटियों पर कब्जा जमाए बैठे थे और नीचे से आगे बढ़ रहे भारतीय जवानों पर भारी गोलाबारी कर रहे थे, तब पारंपरिक बमबारी बेअसर साबित हो रही थी।

उस कठिन दौर में जितेंद्र मिश्रा के नेतृत्व वाली टीम ने रिकॉर्ड 12 दिनों के भीतर मिराज-2000 लड़ाकू विमानों में लेजर-गाइडेड बम फिट करने की तकनीक विकसित की। ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के तहत सटीकता से किए गए इन हवाई हमलों ने दुश्मनों के बंकर ध्वस्त कर दिए और युद्ध का रुख भारत के पक्ष में मोड़ दिया।

3,000 घंटे से अधिक समय तक उड़ान भरने का अनुभव रखने वाले मिश्रा ने 18 से भी अधिक प्रकार के विमान उड़ाए हैं। वे ‘एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट’ में चीफ टेस्ट पायलट रहने के साथ-साथ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ जैसे उच्च पदों को भी संभाल चुके हैं। अब उनका यही अनुशासन और नेतृत्व कौशल रामनगरी की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने का काम करेगा।

अग्निपरीक्षा/चुनौतियाँ:

  • मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और चोरी के मामलों के बाद वित्तीय पारदर्शिता बहाल करना।
  • अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच दर्शन व्यवस्था।
  • मंदिर के प्रबंधन को अत्यधिक पेशेवर और अनुशासनबद्ध बनाना।
  • नकद चढ़ावे की गिनती में मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए नए तकनीकी उपाय लागू करना।

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